योजना के बारे मे
मध्यप्रदेश में 15 अगस्त, 1986 को महिला एवं बाल विकास संचालनालय का गठन किया गया तथा महिलाओं एवं बच्चों से संबंधित समस्त योजनाएं आदिम जाति कल्याण विभाग और पंचायत एवं समाज कल्याण विभाग से इस संचालनालय को हस्तान्तरित की गई। प्रारंभ में यह संचालनालय पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के प्रशासकीय नियंत्रण में रहा तथा वर्ष 1988 में पृथक से महिला एवं बाल विकास विभाग का गठन किया गया। इससे समाज में महिलाओं की स्थिति में निरंतर सुधार हुआ है, महिलाओं में अपने अधिकारों व हितों के प्रति जागरुकता आई है, बच्चों के कुपोषण में कमी आई है।

योजना की पात्रता
सामान्य प्रकरण की स्थिति में
- आवेदक मध्य प्रदेश का स्थायी निवासी होना चाहिए।
- मध्यप्रदेश के स्थानीय निवासी परिवार के 18 वर्ष से कम उम्र के बच्चे।
- जिनके माता-पिता की मृत्यु हो चुकी है ।
- वह रिश्तेदार अथवा संरक्षक की देखरेख में रह रहे हों।
आवश्यक दस्तावेज
- बालिका की समग्र आईडी व परिवार आईडी |
- बालिका का माता / पिता के साथ फोटो |
- परिवार नियोजन प्रमाण-पत्र (द्वितीय बालिका की स्थिति में) |
- सभी आवश्यक दस्तावेज jpg, jpeg, png, gif, JPG, JPEG, PNG, GIF आदि फॉर्मेट में हो सकते हैं, इनके अतिरिक्त अन्य कोई फॉर्मेट मान्य नहीं है |
- सभी दस्तावेजों की साइज़ 40 KB से 200 KB के मध्य हो सकती है, इससे कम या ज्यादा साइज़ मान्य नहीं है |
योजना के लाभ
- प्रदेश की गर्भवती /धात्री महिलाओं तथा 0-6 वर्ष के बच्चों को स्वास्थ्य व पोषण सेवायें ।
- बच्चों के शारीरिक, मानसिक, बौद्धिक विकास तथा स्वास्थ्य व पोषण की स्थिति में सुधार लाना।
- महिलाओं के संवैधानिक हितों को सुरक्षित रखना, महिलाओं के कल्याण, सुरक्षा से सम्बन्धित कानूनों एवं विभिन्न योजनाओं के प्रति जागरूकता बढाना ।
- प्रदेश की महिलाओं एवं बच्चों में व्याप्त कुपोषण, अशिक्षा, अज्ञानता से मुक्त करना एवं स्वस्थ समाज की नींव डालना ।
